कौन कहता है कि आदिवासी को आदिवासी जमीन पर नहीं मिलेगा लोन

झारखंड, छत्तीसगढ़ समेत सभी आदिवासी बहुल प्रदेशों के लिए यूको बैंक ने निकाल दी राहत की राह

आशियाना के लिए भारत एवं राज्य सरकार में कार्यरत आदिवासियों को 35 लाख तक ऋण मिलेगा

रेल, बैंक, यूसिल, डीवीसी, सीसीएल, बीसीसीएल, एचईसी जैसे अर्ध सरकारी संस्थानों में भी यह सुविधा

टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, जिंदल जैसे कॉरपोरेट के लोगों को लोन मगर यूको बैंक में चाहिए सैलरी खाता

आदिवासियों के लिए आई योजना का नाम यूको आशियाना, सालाना 7.55 फीसद ब्याज देना होगा

अश्विनी रघुवंशी

कौन कहता है कि आदिवासी जमीन पर घर बनाने के लिए किसी आदिवासी को बैंक से ऋण नहीं मिल सकता। पूर्वोत्तर भारत में अग्रणी यूको बैंक ने आदिवासियों के लिए विशेष आवासीय योजना यूको आशियाना की शुरुआत की है। इसके तहत भारत सरकार, राज्य सरकार और अर्ध सरकारी संस्थानों के आदिवासी अधिकारियों और कर्मचारियों सीएनटी, एसपीटी एक्ट और ऐसी सभी जमीनों पर आवास बनाने के लिए ऋण दिया जाएगा। भारतीय रेल, सार्वजनिक बैंक, एलआईसी, बीसीसीएल, सीसीएल, ईसीएल, यूसिल, सेल, डीवीसी, एचसीएल, झारखंड विद्युत वितरण निगम, एचईसी, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिन्दुस्तान, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कोल इंडिया लिमिटेड, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, एनटीपीसी, पावर ग्रिड ऑफ इंडिया, ओएनजीसी, भेल जैसे सारे अर्ध सरकारी संस्थानों के सरकारी सेवकों को भी इस योजना के दायरे में रखा गया है। टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, जिंदल स्टील, एस्सार स्टील, टाटा पावर, अदाणी पावर, नाल्को, टीसीएस, टाटा हाउसिंग, अल्ट्राटेक सीमेंट, एसीसी सीमेंट, विप्रो समेत बड़े कॉरपोरेट हाउस के अधिवारी अधिकारियों और कर्मचारियों को भी आदिवासी भूमि पर घर बनाने, उसका जीर्णोद्धार करने या फ्लैट खरीदने के लिए लोन दिया जाएगा। शर्त यह है कि संबंधित व्यक्ति का सैलरी खाता का यूको बैंक में ही संचालन किया जाएगा। इसके अलावा कॉरपोरेट संस्थानों के प्रतिनिधियों को ऋण राशि के बराबर की हैसियत वाला गारंटर भी देना होगा। इसके लिए 7.55 फीसद सालाना ब्याज तय किया गया है। यदि सिविल स्कोर बढ़िया है तो ब्याज की दर में हल्का परिवर्तन भी हो सकता है।

झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ समेत कई प्रदेशों में आदिवासी की जमीन के लिए ऐसे कानून हैं जिसके कारण गैर आदिवासी को आसानी से किसी और को बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सके। और भी कई प्रदेश हैं जहां आदिवासी जमीन के लिए ऐसे कानून हैं जिसके कारण आसानी से उसे कोई व्यक्ति या संस्थान नहीं ले सकता। यही वजह है कि आदिवासी जमीन पर घर बनाने के लिए किसी आदिवासी को बैंक आसानी से ऋण नहीं देते। अगर किसी प्रदेश में ऋण मिलता भी है तो बहुत कम। पूर्वोत्तर भारत के अग्रणी बैंक में शुमार यूको बैंक का मुख्यालय कोलकाता है। उसके शीर्ष प्रबंधन ने झारखंड में सीएनटी एवं एसपीटी एक्ट के कारण आदिवासियों को होम लोन नहीं मिलता। ओडिशा और छत्तीसगढ़ में आदिवासी जमीन पर होम लोन पाना बेहद कठिन है। यूको बैंक ने इसका रास्ता निकाला है। अब आदिवासियों की बड़ी आबादी को अपनी जमीन पर घर बनाने या खरीदने के लिए आसानी से ऋण मिल सकेगा। जनजातीय समाज की वर्तमान के साथ भावी पीढ़ी के लिए यह गेमचेंजर साबित हो सकता है। कोलकाता मुख्यालय ने यूको आशियाना योजना के तहत होम लोन के आवेदन के निष्पादन पर तत्परता दिखाने के निर्देश दिए हैं।

35 लाख तक मिलेगा ऋण, 15 साल में लौटाना होगा

यूको बैंक की इस योजना में आम लोन होम योजना के वनिस्पत तनिक बदलाव भी है। आम तौर पर 30 साल तक के लिए होम लोन मिल जाते हैं। क्रेडिट स्कोर बढ़िया है तो होम लोन का ऋण करोड़ों में भी होता है। यूको बैंक ने इस योजना के लिए ऋण की अधिकतम सीमा 35 लाख निर्धारित की है जबकि लोन चुकाने की अधिकतम अवधि 15 साल तय की गई है।

घर बनाने या खरीदने के लिए 20 फीसद मार्जिन मनी तो पुनरुद्धार के लिए 25 प्रतिशत खुद का खर्च

मार्जिन मनी आवासीय ऋण का वह हिस्सा होता है जिसका भुगतान बैंक ग्राहक खुद अपनी जेब से करते हैं, जबकि बाकी बची राशि को बैंक बतौर लोन देते हैं। मार्जिन मनी शुरुआती अग्रिम भुगतान होता है। यह बैंक के जोखिम को कम करता है। आदिवासी जमीन के लिए लाई गई विशेष योजना में नया घर बनाने, बना बनाया घर या फ्लैट खरीदने के लिए 20 फीसद मार्जिन मनी निर्धारित की है। घर के आधुनिकीकरण के लिए ऋण देने की व्यवस्था की गई है। मगर इसके लिए 25 फीसद मार्जिन मनी देना होगा।

और भी वो सब कुछ जो जानना आपके लिए बेहद उपयोगी होगा

  • इस विशेष आवासीय योजना का लाभ 21 से 60 साल के उम्र के लोगों को ही मिलेगा।
  • ऋण स्वीकृत होने के बाद 2 साल के भीतर आवास का निर्माण करना होगा।
  • एक रुपए भी प्रोसेसिंग शुल्क नहीं लगेगा, न ही प्रिपेमेंट और डॉकमेंटेशन चार्ज लिया जाएगा।

एमडी अश्वनी ने जमीनी जरूरत जानने के बाद दिखाई हरी झंडी, जोनल मैनेजर भावना अधीनस्थों को समझा रही संभावना

एमडी सह सीईओ
अश्वनी कुमार, यूको बैंक

ब्याज दर गिरने के बाद भी झारखंड समेत कुछेक प्रदेशों में होम लोन के लिए अपेक्षित आकर्षण नहीं दिखा तो यूको बैंक के एमडी सह सीईओ अश्वनी कुमार ने इसके कारणों को गहराई से समझने का प्रयास किया। झारखंड की जोनल मैनेजर भावना सिन्हा ने कोलकाता मुख्यालय के शीर्ष अधिकारियों को जानकारी दी कि सीएनटी और एसपीटी जमीन के उपयोग की राह मिलेगी तो आगे का रास्ता खुलेगा। छत्तीसगढ़, ओडिशा, असम, बंगाल के आदिवासी बहुल इलाके से भी जमीनों से जुड़े लफड़े यूको बैंक के शीर्ष प्रबंधन के संज्ञान में लाए गए। एमडी सह सीईओ के निर्देश पर उच्चस्तरीय समिति द्वारा सीएनटी, एसपीटी जैसी जमीनों पर होम लोन देने के तौर तरीके का अध्ययन किया गया। ऋण वसूली के तमाम रास्तों पर विचार किया गया। आखिरकार हाई लेवल कमेटी की सिफारिश को एमडी सह सीईओ अश्वनी कुमार की मंजूरी मिल गई और यूको आशियाना योजना अस्तित्व में आ गईं। अब झारखंड की जोनल मैनेजर भावना सिन्हा ने सभी शाखा प्रबंधकों को संदेश दिया कि यूको आशियाना में खूब संभावना है। लोगों को जागरूक करे। लोन की स्वीकृति की प्रक्रिया में हर स्तर पर तत्परता दिखाई जानी चाहिए।


सीएनटी जमीन है तो भी ऋण स्वीकृत किया जाएगा

“झारखंड में जमीन का बड़ा हिस्सा सीएनटी और एसपीटी एक्ट के दायरे में आता है। ऋण नहीं मिलने के कारण लोग अपनी जमीन पर आसानी से घर नहीं बना पा रहे हैं। अब यूको बैंक ने पूरे देश में आदिवासियों के लिए यूको आशियाना योजना पेश की है। जैसे जैसे जनजातीय समाज के लोग जागरूक होते जाएंगे, लोगों को अधिकतम लाभ मिलेगा। यह आम होम लोन योजना की तरह है। कुछ शर्तें जरूर जोड़ी गई है ताकि बैंक का ऋण भुगतान सहज और सरल तरीके से होता रहे। यूको आशियाना के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा।”

– ऋचा सिन्हा, जुगसलाई शाखा प्रबंधक, यूको बैंक


“भारत सरकार के स्वामित्व के सार्वजनिक क्षेत्र के यूको बैंक ने बड़ी पहल की है। झारखंड में सीएनटी और एसपीटी एक्ट में आदिवासी, अनुसूचित जाति के साथ पिछड़ा वर्ग की बड़ी आबादी की जमीन आती है। पहली बार बैंक ने आम ग्राहकों की तरह आदिवासी और मूलवासी के लिए होम लोन की योजना पेश की है जो स्वागत योग्य है। अधिकतम लोगों को इसका लाभ मिलना चाहिए। ऐसा रास्ता खुला है जो भविष्य को दिशा देगा। झारखंड के अलावा छत्तीसगढ़, उड़ीसा, बंगाल, असम समेत दूसरे राज्यों के जनजातीय समाज को भी इसका लाभ मिलेगा।”

– विद्युत वरण महतो, भाजपा सांसद, जमशेदपुर क्षेत्र


“झारखंड में सीएनटी और एसपीटी एक्ट में आने वाली आदिवासी भूमि पर आदिवासी को आवासीय ऋण देने की यूको बैंक की योजना दूरगामी है। जनजातीय समाज के साथ इस एक्ट में आने वाली और जातियों के लोगों को भी अपनी जमीन पर घर बनाने के लिए सरल ऋण देने का निर्णय स्वागत योग्य है। जनजातीय सलाहकार पर्षद (टीएसी) में भी यह विचार के लिए अहम मसला रहा है। भविष्य में झारखंड की और बैंकों के शीर्ष प्रबंधन से संवाद किया जाएगा। कहा जायेगा कि यूको बैंक की पहल को आगे बढ़ाएं।”

– स्टीफन मरांडी, सदस्य, जनजातीय सलाहकार पर्षद सह पूर्व वित्त मंत्री, झारखंड


“वाह,वाह,वाह। स्वागतम्। नए साल पर यूको बैंक ने झारखंडियों को ऐसा तोहफा दिया है जो उनकी भावी पीढ़ी की तकदीर बदलने का मार्ग प्रशस्त करेगा। वास्तव में यूको बैंक का यह कदम जनजातीय समाज के साथ झारखंडियों में औरों की तरह समानता का भाव जागृत करेगा। इससे आदिवासी और मूलवासी की बड़ी आबादी को अपनी जमीन पर घर बनाने या फ्लैट लेने के लिए बैंक ऋण की सुविधा मिलेगी। सालाना ब्याज दर सिर्फ साढ़े सात प्रतिशत पर। झारखंड सरकार को और बैंकों से भी बात करनी चाहिए कि इस तरह की ऋण योजना वो भी शुरू करे। मैं यूको बैंक जाकर उनके प्रतिनिधियों को साधुवाद देना चाहता हूं।”

– राजा पीटर, पूर्व मंत्री, झारखंड सरकार


“झारखंड के सभी जिलों की बात करें तो तुलनात्मक तौर पर जनजातीय समाज की सर्वाधिक आबादी पश्चिम सिंहभूम में रहती है। आदिवासियों को आशियाना बनाने के लिए बैंकों से ऋण नहीं मिलता। आदिवासियों को होम लोन मिलना बड़ी बात है। यूको बैंक ने सीएनटी और एसपीटी जमीन पर इससे जुड़े लोगों के लिए होम लोन देने की योजना पेश की है तो यह गेमचेंजर साबित होगा। जनजातीय समाज के पात्र लोगों को यूको आशियाना योजना का लाभ लेना चाहिए। जब जनजातीय समाज बैंकों के साथ काम करने में सहज हो जाएगा तो उन्हें तरक्की से कोई नहीं रोक पाएगा। यूको बैंक के एमडी समेत सारे लोगों को साधुवाद।”

गीता बालमुचू, भाजपा जिलाध्यक्ष, चाईबासा, पश्चिम सिंहभूम


“झारखंड आंदोलन के जमाने से सीएनटी और एसपीटी एक्ट की जमीन पर बैंकों से ऋण लेना जटिल मसला रहा है। झारखंड बनने के 25 साल बाद भी होम, कमर्शियल या कृषि लोन सहज नहीं हो सका है। यूको बैंक ने होम लोन की योजना शुरू की है जो स्वागत योग्य है। झारखंडियों के लिए रास्ता खुला है। यह बड़ी तरक्की का आधार बनेगा। यूको बैंक को साधुवाद।”

– वीर सिंह सुरीन, झारखंड आंदोलनकारी सह पूर्व सांसद और विधायक प्रतिनिधि


“झारखंड, ओडिशा समेत पूरे पूर्वोत्तर भारत में अनेक कॉरपोरेट हाउस है जो राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे हैं। झारखंड में एससी, एसटी और बैकवर्ड क्लास की बड़ी आबादी है जो सीएनटी और एसपीटी एक्ट के दायरे में आती है। जमीन का आम हस्तांतरण का प्रावधान नहीं होने के कारण अपना घर बनाने के लिए ऐसे लोगों को बैंकों से लॉन नहीं मिल पाता। यह पूरे झारखंड के लोगों की समस्या है, चाहे वो सरकारी सेवक हो, कॉरपोरेट हाउस के लोग हो अथवा आम आबादी। यूको बैंक ने सीएनटी और एसपीटी एक्ट से जुड़े कॉरपोरेट के लोगों को होम लोन देने की योजना बनाई है तो यह स्वागत योग्य है। टाटा स्टील में भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो इसका लाभ ले सकते हैं। सरकार और कॉरपोरेट हाउस को इसे और प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।”

– सतीश सिंह, महामंत्री, टाटा वर्कर्स यूनियन (टाटा स्टील की अधिकृत ट्रेड यूनियन)

(🖊️ लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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