टाटा स्टील में वेज रिवीजन पर एनएस के कमेटी मेंबरों की गोलबंदी

टाटा वर्कर्स यूनियन के सभागार में एनएस के कमेटी मेंबर जमा हुए, वेज रिवीजन की वार्ता में विलंब पर जताया गुस्सा

अगले सप्ताह यूनियन अध्यक्ष समेत टॉप थ्री से सीधी बात, सुनवाई नहीं हुई तो रोज ऑफिस बेयरर्स को सुनाएंगे व्यथा

ओल्ड सीरीज के बराबर राशि की एमजीबी और प्रतिशत में डीए के लिए यूनियन नेतृत्व पर दबाव बनाएंगे एनएस

हालांकि एनएस के आधे से ज्यादा कमेटी मेंबरों के पास वेज जैसे मसले पर भी अपनी एकता दिखाने की फुर्सत नहीं

एस वंदना

टाटा स्टील में तीन ग्रेड के कर्मचारी कार्यरत हैं, ओल्ड सीरीज, न्यू सीरीज और एसोसिएट। फिलवक्त कंपनी में स्थाई कर्मचारियों की संख्या तकरीबन साढ़े दस हजार है। इनमें न्यू सीरीज के कर्मचारी आधे से ज्यादा हैं। ओल्ड और न्यू सीरीज के कर्मचारियों के वेतनमान पर गौर करे तो दोगुने से भी अधिक का फासला है। ओल्ड सीरीज के कर्मचारियों के डीए यानी महंगाई भत्ता में बढ़ोत्तरी प्रतिशत के आधार पर होती है तो न्यू सीरीज के कर्मचारियों के डीए की दर प्रति प्वाइंट तीन रुपए है। फिक्स डीए भी महज कुछ सौ रुपए। निर्धारित तिथि से टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट में नया वेज रिवीजन होने में एक साल से अधिक समय का विलंब हो चुका है। विलंब से वेज रिवीजन होने पर बेसिक और डीए की बढ़ी हुई राशि एरियर में मिल जाती है। दर्जन भर एलाउंस में भी वेज रिवीजन में बढ़ोत्तरी होती है। एरियर में वो बढ़ी हुई राशि नहीं मिलती। न्यू सीरीज के कर्मचारियों के लिए एक एक रुपए मायने रखते हैं। वेज रिवीजन में विलंब हो रहा है तो उनमें बैचेनी बढ़ रही है। वे अपने विभाग या सेक्शन के टाटा वर्कर्स यूनियन के कमेटी मेंबर (कार्यकारिणी सदस्य) से जवाब तलब कर रहे हैं। कमेटी मेंबर जानते हैं कि बेहतर और जल्दी वेज रिवीजन के लिए यूनियन नेतृत्व पर दबाव बनाना होगा। इसी मकसद से बुधवार को एनएस के कमेटी मेंबर टाटा वर्कर्स यूनियन के सभागार में इकट्ठा हुए। तय हुआ कि अगले सोमवार को यूनियन अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी समेत टॉप थ्री से एनएस कर्मचारियों की भावनाओं पर सीधी बात की जाएगी। अगर सुनवाई नहीं हुई अथवा एनएस कर्मचारियों के मसले पर यूनियन नेतृत्व ने संजीदगी नहीं दिखाई तो एक सप्ताह तक रोज ऑफिस बेयरर्स के कार्यालय कक्ष में जाकर उन्हें अपनी व्यथा सुनाई जाएगी।

एनएस ग्रेड के कर्मचारियों की इस लड़ाई का एक पहलू यह भी है कि उनके बीच से आने वाले ऐसे कमेटी मेंबर भी है जो बेहद संजीदा नहीं दिखते। कुछ कमेटी मेंबर बेहतर वेज रिवीजन के लिए हर स्तर पर आवाज उठा रहे हैं तो आधे ऐसे भी है जिनके पास फुर्सत ही नहीं है। बुधवार को ही यूनियन कार्यालय में वेज जैसे संवेदनशील मसले पर हुई बैठक में एनएस ग्रेड के आधे कमेटी से ज्यादा कमेटी मेंबर अनुपस्थित रहे। ऐसा भी नहीं था कि इसमें यूनियन के भीतर की किसी तरह की राजनीति हो रही थी। जो कमेटी मेंबर आए, उन्हें अलग अलग खेमों का माना जाता रहा है, अलग अलग यूनियन लीडरों के करीबी में उनकी भी गिनती है। मगर एनएस कर्मचारियों के मसले पर सब एकजुट दिखे। उनकी आवाज एक रही। बैठक में आए एनएस के कमेटी मेंबरों का तर्क था कि पीएन सिंह के यूनियन अध्यक्ष रहते जो वेज समझौता हुआ था, उसमें टॉप थ्री में होने के नाते टुन्नू चौधरी भी वार्ताकारों में थे। तब ओल्ड ग्रेड के बराबर एमजीबी की राशि मिली थी। वहीं अबकी लागू करा दे तो बहुत बढ़िया होगा। उस वक्त एनएस कर्मचारियों के लिए भी टैप्स (पेंशन स्कीम) शुरू हुआ था। सो, इस बार टैप्स जैसी कोई जरूरत नहीं है। सिर्फ ओल्ड सीरीज की तरह डीए को प्रतिशत में करा दिया जाय तो भला हो जाएगा। यदि प्रतिशत में बात नहीं बने तो फिक्स डीए की राशि बढ़ाई जाय तो वेरिएबल डीए को न्यूनतम छह रुपए प्रति प्वाइंट कराया जाय ताकि ओल्ड और न्यू सीरीज के वेतनमान के विशाल अंतर को कुछ हद तक पाटने की दिशा में आगे बढ़ा जा सके। बैठक में एनएस ग्रेड से चुने गए टाटा वर्कर्स यूनियन के उपाध्यक्ष संजीव कुमार तिवारी, सहायक सचिव श्याम बाबू और पीएफ ट्रस्टी श्याम सुंदर गोप भी मौजूद थे। इन तीनों ने भी एनएस के बाकी कमेटी मेंबरों के सुर में सुर मिलाने में तनिक भी गुरेज नहीं किया।

::: गौर करने लायक :::

वेज रिवीजन में विलंब के मसले पर बैठक करने वाले एनएस के कमेटी मेंबर

शशि कांत बेहरा, मृत्युञ्जय मिश्रा, बालाजी भगत, शुभम मिश्रा, राजेश कुमार सिंह, चंदन गुप्ता, विकास दास, संतोष पांडेय, अमन दीप, राकेश नाइक, होमेंस, सत्य प्रकाश, सुमन पांडेय, मंगल महतो, किशोर कुणाल, परितोष कुमार सिंह, दिनेश कुमार, निलेश कुमार सिंह, रुपेश कुमार पांडेय, प्रदीप दुबे, राहुल श्रीवास्तव, संतोष सिंह, देवेन मिस्त्री, राजेश कुमार, पवन, अमित कुमार, नीरज पराशर, सुशांत शेखर, अनिल कुमार झा, हरिओम जायसवाल, पवन कुमार सिंह, कुंदन, बिजेंद्र शाह, श्याम सुंदर गोप, रणवीर सिंह

एनएस के ये कमेटी मेंबर वेज जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी अनुपस्थित

संजय कुमार सिंह, राकेश कुमार सिंह, विनोद राय, गौरव केवर्त, बंटी पांडेय, अमित सिंह, हेमंत, निखिल जायसवाल, अरिंदम धर, विभाकर राय, ब्रजेश पटेल, चंदन घोष, हरिराम शर्मा, मनोज कुमार, ज्ञान प्रकाश, बैजू पंडित, सर्वेंद्र झा, सर्वेश, बसंत बाग, बंशीधर महतो, सीएस ठाकुर, निरंजन महापात्रा, विवेक विक्की, गिरीश, सौम्य रंजन दास, शिव रंजन कुमार, अनुप ठाकुर, चंदन सिंह, श्याम नंदन, रोशन कुमार, पवन प्रकाश, शशि भूषण पिंगुआ, रवि उपाध्याय, रिंकू यादव, संतोष कुमार, श्यामल, सुब्रत कुमार, डी भानु, राकेश कुमार सिंह, संजीव पांडा, शनवाज खान, विवेक भारद्वाज, ब्रजेश पांडेय, निशांत पराशर एवं मुन्ना सिंह

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