मकर के बाद 16 जनवरी को कलिंगा नगर में वेज पर टाटा प्रबंधन के साथ यूनियन की पहली बैठकी
प्रबंधन ने कलिंगानगर में टाटा स्टील कलिंगानगर वर्कर्स यूनियन को दी मान्यता, उसी से वेज वार्ता

अश्विनी रघुवंशी
टाटा स्टील के कलिंगानगर प्लांट में भी नए साल की पहली जनवरी से वेज रिवीजन लंबित हो चुका है। टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट की बात करे तो यहां कर्मचारियों के ग्रेड रिवीजन को लंबित हुए एक साल से अधिक समय हो चुका है। 2019 में कलिंगानगर प्लांट के कर्मचारियों के लिए भी सात साल के लिए वेज रिवीजन का एग्रीमेंट किया गया। अब उस समझौता की अवधि पूरी हो चुकी है। यही वजह है कि टाटा स्टील के कलिंगानगर के कारखाना में काम करने वाले कर्मचारी नए वेतनमान के निर्धारण के मसले पर चर्चा शुरू कर चुके हैं। ट्रेड यूनियन ने टाटा स्टील प्रबंधन को पहले ही वेज रिवीजन पर चार्टर ऑफ डिमांड भेजा हुआ है। इधर टाटा स्टील प्रबंधन के मानव संसाधन विभाग (एचआरएम) ने मकर संक्रांति के बाद शुभ काल में 16 जनवरी को कलिंगानगर की ट्रेड यूनियन को वेज रिवीजन के मसले पर वार्ता के लिए जमशेदपुर आमंत्रित किया है। यह वेज पर पहली वार्ता होगी। संभावना है कि इसमें कलिंगानगर की मान्यता प्राप्त यूनियन को कंपनी प्रबंधन वेज के मसले पर अपनी सोच का इशारा करेगा।
टाटा स्टील के कलिंगानगर प्लांट में फिलवक्त तकरीबन 42 सौ कर्मचारी कार्यरत हैं। कर्मचारियों के चार तरह के ग्रेड है, केपीओ जीरो, केपीओ वन, केपीओ टू और केपीओ थ्री। कलिंगानगर में प्लांट स्थापना के लिए टाटा स्टील प्रबंधन ने जमीन अधिग्रहण किया था तो रैयतों को भी नौकरी दी गई। उनमें कई रैयत ऐसे थे जो माध्यमिक तक भी पढ़ाई नहीं किए थे। ऐसे लोगों को केपीओ जीरो ग्रेड में रखा गया। माध्यमिक या उससे ऊपर तालीम पा चुके लोगों की केपीओ वन ग्रेड में नियुक्त किया गया। ट्रेड अप्रेंटिस किए लोगों की केपीओ वन और डिप्लोमाधारक की केपीओ टू ग्रेड में बहाली की गई। इन्हीं चार ग्रेड में सारे कर्मचारी हैं। जमशेदपुर प्लांट में कर्मचारियों के प्रतिनिधि के तौर पर सिर्फ एक ट्रेड यूनियन टाटा वर्कर्स यूनियन है जो इंटक से संबद्ध है। कलिंगानगर में शुरुआती काल से सक्रिय टाटा स्टील कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन है। टाटा स्टील कलिंगानगर वर्कर्स यूनियन का दावा है कि उनके सर्वाधिक सदस्य है। आशय यह है कि सबसे ज्यादा कर्मचारी उनकी यूनियन से जुड़े हुए हैं। इस यूनियन के अध्यक्ष रवींद्र जामुदा हैं। यही टाटा स्टील प्रबंधन की मान्यता प्राप्त यूनियन है। टाटा स्टील कलिंगानगर इम्प्लाइज यूनियन की है जिसके अध्यक्ष मनोज शामल हैं। ऐसी और दो यूनियन और भी हैं जो अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है।
दूसरी स्टील कंपनियों का रुख कर रहे हैं कलिंगानगर के कर्मचारी
टाटा स्टील के कलिंगानगर प्लांट के कर्मचारी दूसरी कंपनियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। वहां की ट्रेड यूनियनों का आकलन है कि तकरीबन 100 कर्मचारी टाटा स्टील से इस्तीफा देकर जिंदल जैसी दूसरी कंपनियों में योगदान दे चुके हैं। वे इसका कारण टाटा स्टील के वेज स्ट्रक्चर को मान रहे हैं। चाहते है कि अगला वेज रिवीजन ऐसा होना चाहिए कि कर्मचारियों को टाटा स्टील छोड़ने के बारे में सोचना ही नहीं पड़े। ट्रेड यूनियनों का तर्क यह भी है कि अब टाटा स्टील का कलिंगानगर प्लांट वयस्क हो चला है। आसानी से निर्धारित समय के भीतर कलिंगानगर प्लांट का विस्तारीकरण भी हुआ है। सो, वेज रिवीजन में कर्मचारियों को इसका भरपूर ईनाम भी मिलना चाहिए।
टाटा वर्कर्स यूनियन के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क में रहते है रवींद्र जामुदा

टाटा स्टील की कलिंगानगर इकाई की ट्रेड यूनियन टाटा स्टील कलिंगानगर के लीडर रवींद्र जामुदा हमेशा टाटा वर्कर्स यूनियन के शीर्ष नेतृत्व के लगातार संपर्क में रहते हैं। कलिंगानगर के यूनियन लीडरों को अब अंदाजा हो चुका है कि कंपनी प्रबंधन और टाटा वर्कर्स यूनियन के बीच जो भी समझौता होता है, वो बाकी जगहों के लिए आधार तय करता है। टाटा समूह की दूसरी कंपनियों के ट्रेड यूनियन लीडर अपने यहां की परिस्थिति पर चर्चा कर थोड़ा बहुत सुधार कराते रहे हैं। इस कारण भी टाटा वर्कर्स यूनियन द्वारा जमशेदपुर प्लांट के कर्मचारियों के लिए किया गया समझौते की अहमियत बढ़ जाती है। वही बड़ा आधार बनता है।
(🖊️ लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)
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