मनोज टाटा स्टील कलिंगा नगर इम्प्लाइज यूनियन के अध्यक्ष, उनकी यूनियन को प्रबंधन से मान्यता नहीं
जो कर्मचारी कलिंगा नगर इम्प्लाइज यूनियन के सदस्य, वो कारखाना में कोई चुनाव नहीं लड़ सकते
निकट भविष्य में पांच और जेडीसी का गठन होगा जिसमें कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन के सदस्य ही रहेंगे
ट्रेड यूनियन एक्ट के तहत कर्मचारी दो यूनियन के सदस्य नहीं हो सकते, एक को ही चुनना होगा
भविष्य में कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन के सदस्य ही लड़ेंगे कमेटी मेंबरों एवं ऑफिस बेयरर्स का चुनाव
वेज रिवीजन पर जामुदा की अगुवाई वाले कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन से कंपनी ने शुरू की वार्ता

अश्विनी रघुवंशी
टाटा स्टील की कलिंगा नगर इकाई में जो लोग भी ट्रेड यूनियन की राजनीति करने की इच्छा रखते हैं, उनके पास टाटा स्टील कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन की सदस्यता होनी चाहिए। इसकी वजह है कि टाटा स्टील प्रबंधन ने रवींद्र जामुदा की अध्यक्षता वाली टाटा स्टील कलिंगा नगर यूनियन को मान्यता दी है। वेज रिवीजन, सालाना बोनस, मैनपावर निर्धारण, एक्टिंग एलाउंस, किसी आरोप में चार्जशीट या बर्खास्तगी समेत कर्मचारियों से जुड़े किसी भी मामले पर टाटा स्टील प्रबंधन कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन से बात करेगा। कर्मचारियों के मसले पर कंपनी प्रबंधन किसी और ट्रेड यूनियन से बात ही नहीं करेगा। ऐसे में कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन से इतर और ट्रेड यूनियन चलाने वालों की मजदूर राजनीति का अब खात्मा हो चुका है। मनोज शामल जैसे चर्चित चेहरा अभी भी टाटा स्टील कलिंगा नगर इम्प्लाइज यूनियन को चला रहे हैं। उनकी यूनियन जीवित रह सकती है, मगर कलिंगा नगर के कर्मचारियों के नजरिए से अब इसका कोई मायने नहीं है। किसी को भी टाटा स्टील की कलिंगा नगर इकाई में मजदूर राजनीति करनी है तो वर्कर्स यूनियन का सदस्य बनना होगा। मजदूरों का अगुवा बनना है तो सदस्य बन कर टाटा स्टील कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन का ही चुनाव जीतना होगा। दूसरा कोई विकल्प शेष नहीं है।
टाटा स्टील का कलिंगा नगर में कारखाना बनना शुरू हुआ था तो रवींद्र जामुदा और मनोज शामल मजदूर राजनीति के चेहरे बन कर उभरते गए। रवींद्र जामुदा ने टाटा स्टील कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन की कमान संभाल ली तो मनोज शामल ने टाटा स्टील कलिंगा नगर इम्प्लाइज यूनियन की अगुवाई शुरू की। टाटा स्टील प्रबंधन असमंजस में था कि दोनों में किस यूनियन को मान्यता दी जाय। आखिरकार कंपनी प्रबंधन ने इसका फैसला कर्मचारियों पर छोड़ने का फैसला लिया। कर्मचारियों के बीच मतदान कराया गया। कर्मचारियों के बहुमत ने टाटा स्टील कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन का साथ दिया। इसके बाद कंपनी प्रबंधन ने वर्कर्स यूनियन को मान्यता दे दी। टाटा समूह की किसी भी कंपनी में दो या उससे अधिक ट्रेड यूनियन को प्रबंधन मान्यता नहीं देता। कंपनी सिर्फ एक यूनियन से बात करती है। हमेशा। आशय यह है कि लोग अलग अलग ट्रेड यूनियन भले बना ले, कर्मचारियों से जुड़े किसी भी मामले में प्रबंधन उनसे कोई बात नहीं करता। यदि कर्मचारियों की बात करे तो ट्रेड यूनियन एक्ट के मुताबिक दो यूनियन के सदस्य नहीं हो सकते। उन्हें एक यूनियन को अपनाना होगा। कर्मचारी किसी और यूनियन के सदस्य हैं तो स्वाभाविक तौर पर उनके व्यक्तिगत मसले पर मान्यता प्राप्त कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन कंपनी प्रबंधन से कोई बात नहीं करेगी। और किसी और यूनियन से कंपनी प्रबंधन बात नहीं करेगा। ऐसी हालत में कर्मचारी का नुकसान निश्चित है।
टाटा स्टील के शीर्ष प्रबंधन ने बिना बोले अपने कर्मचारियों को साफ संदेश दे दिया है। वेज रिवीजन के मसले पर कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन के साथ वार्ता शुरू कर दी है। वर्कर्स यूनियन के ऑफिस बेयरर्स को ड्यूटी से रिलीज किया गया है। मनोज शामल समेत किसी और यूनियन के लीडर को ड्यूटी से मुक्ति नहीं मिली है। मिस पंच करने या ड्यूटी में काम नहीं करने पर और कर्मचारियों की तरह उन लोगों को भी चार्जशीट दिया जा सकता है। भविष्य में टाटा स्टील कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन का चुनाव होगा तो हरेक विभाग से कमेटी मेंबर चुने जाएंगे। कमेटी मेंबरों को ही जेडीसी में जगह मिलेगी जो कत्लखाना में प्रबंधन और यूनियन के प्रतिनिधियों की संयुक्त काउंसिल होगी। भविष्य में कर्मचारियों के लिए क्लब हाउस, अस्पताल, स्कूल, खेलकूद आदि के लिए कोई प्रबंधन समिति बनाई जाती है तो उसमें कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन के कमेटी मेंबर और ऑफिस बेयरर्स को आसानी से जगह मिलेगी। आशय यह है कि टाटा स्टील की कलिंगा नगर इकाई में मजदूर राजनीति का भविष्य तय हो चुका है। टाटा स्टील कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन की छतरी के नीचे आकर ही खुद के लिए आगे की राह खोजनी होगी।
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार है)
