Tata Steel Kalinga Nagar : कलिंगा नगर में भी टाटा स्टील के कर्मचारियों को देना होगा यूनियन चंदा

जमशेदपुर में ओल्ड ग्रेड से 80 और एनएस कर्मचारी से 60 से 80 रुपए लिया जा रहा यूनियन चंदा

टाटा वर्कर्स यूनियन के कार्यालय में फिलहाल दो दर्जन कर्मचारी कार्यरत जिससे कामकाज सुगम

कलिंगा नगर में भी कर्मचारियों के वेतन से हरेक माह काटा जाएगा यूनियन की राशि

कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन फिलहाल जमशेदपुर के बराबर चंदा लेने की पक्षधर नहीं

चंदा की राशि से कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन में कर्मचारियों के कामकाज का व्यवस्था बनाई जाएगी

अश्विनी रघुवंशी

ट्रेड यूनियन है तो उससे कर्मचारियों का चंदा भी जुड़ा हुआ है। टाटा स्टील की कलिंगा नगर इकाई ऐसी जगह है जहां तकरीबन एक दशक तक कर्मचारियों को ट्रेड यूनियन का चंदा नहीं देना पड़ा है। कंपनी को भी कर्मचारियों के बहुमत के समर्थन वाली ट्रेड यूनियन के चयन में खूब मशक्कत करनी पड़ी है। अब टाटा स्टील कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन को मान्यता मिल चुकी है। टाटा स्टील प्रबंधन ने कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन के साथ मजदूरों के मसले पर विधिवत समझौता करवा शुरू कर दिया है। सो, अब कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन के लिए कर्मचारियों के वेतन से चंदा काटने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। जल्द ही नियमित तौर पर कर्मचारियों की सैलरी से चंदा की राशि की कटौती कर उसे यूनियन के बैंक खाता में भेजने की व्यवस्था शुरू हो जाएगी। हां, चंदा की राशि टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट में जितनी काटी जाती है, उससे बहुत कम होगी। खुद कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन का शीर्ष नेतृत्व जमशेदपुर प्लांट के बराबर चंदा की राशि काटने के पक्ष में नहीं है।

टाटा स्टील की जमशेदपुर इकाई की बात करे तो यहां दो तरह के कर्मचारी कार्यरत हैं, ओल्ड ग्रेड और न्यू सीरीज। ओल्ड ग्रेड के वेतनमान बहुत बढ़िया है। ऐसे कर्मचारियों से हरेक माह 80 रुपए यूनियन चंदा लिया जाता है। न्यू सीरीज कें कर्मचारियों से इनके ग्रेड के मुताबिक चंदा काटा जाता है जो 60 से 80 रुपए तक है। कलिंगा नगर में टाटा स्टील कलिंगा नगर यूनियन को मान्यता दिए जाने के बाद टाटा स्टील प्रबंधन के मानव संसाधन विभाग के अधिकारियों ने चंदा कटौती का मामला उठाया। कंपनी अधिकारी जानना चाहते थे कि कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन अपने कर्मचारियों से हरेक माह कितना चंदा लेना चाहती हैं। कंपनी अधिकारियों ने यूनियन प्रतिनिधियों को जमशेदपुर इकाई में होने वाली चंदा कटौती की व्यवस्था से अवगत कराया। कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष रवींद्र जामुदा समेत बाकी ऑफिस बेयरर्स ने जमशेदपुर इकाई के बराबर चंदा काटने पर सहमति नहीं जताई। न्यू सीरीज की तरह ग्रेड वार चंदा लिए जाने के विकल्प भी विचार किया गया। यह निर्णय जरूर लिया गया कि जमशेदपुर इकाई की तुलना में कलिंगा नगर में यूनियन के चंदा की राशि आधी से अधिक कतई नहीं होगी। जल्द ही इस मसले पर कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन सोच विचार कर निर्णय लेगी। इसके बाद प्रबंधन को अवगत कराया जाएगा।

दस्तावेज रखने से लेकर कर्मचारियों के लिए अनुशंसा पत्र बनाने के लिए बनानी होगी व्यवस्था

टाटा स्टील कलिंगा नगर यूनियन में अभी तक ढांचागत व्यवस्था नहीं बन सकी है। अब कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन और टाटा स्टील प्रबंधन के बीच अलग अलग मसले पर लिखित समझौता (एग्रीमेंट) शुरू हुआ है। सभी समझौता की कानूनी मान्यता है। सारे दस्तावेज भविष्य में भी कारगर होंगे, चाहे यूनियन की कुर्सी पर कोई भी चुन कर आ जाय। पुराने समझौते के दस्तावेज ही अगले समझौता के वक्त आधार बनेंगे। सो, अब यूनियन को सारे दस्तावेजों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से रखने के इंतजाम करने होंगे। जेडीसी सिस्टम लागू होगा तो यूनियन अध्यक्ष समेत और ऑफिस बेयरर्स कंपनी के कर्मचारियों के लिए अनुशंसा पत्र लिखेंगे। प्रबंधन से लगातार पत्राचार करना होगा। इसके लिए यूनियन को अपने कार्यालय में कुछ कर्मचारियों को नियुक्त करना होगा। इन्हीं सब कार्यों के लिए टाटा वर्कर्स यूनियन ने अपने कार्यालय में तकरीबन दो दर्जन कर्मचारियों को रखा है। स्वाभाविक है कि निकट भविष्य में कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन को भी अपने कार्यालय में बहुत सारे इंतजाम करने होंगे जिसके लिए धन राशि की आवश्यकता होगी। चूंकि, यूनियन कर्मचारियों के लिए है तो उसका खर्च उठाने में कर्मचारियों से भी मदद ली जाएगी। ट्रेड यूनियन एक्ट में भी यही व्यवस्था है।

टाटा वर्कर्स यूनियन के कोषाध्यक्ष अमोद दुबे बोले, यहां 60 से 80 रुपए तक मासिक चंदा

टाटा स्टील की जमशेदपुर इकाई की मान्यता प्राप्त टाटा वर्कर्स यूनियन के कोषाध्यक्ष अमोद दुबे ने बताया कि उनके यहां 60 से 80 रुपए तक मासिक चंदा लिया जाता है। ओल्ड सीरीज के सारे कर्मचारियों से 80 रुपए लेने की व्यवस्था है। न्यू सीरीज के कर्मचारियों के ग्रेड के मुताबिक 60 से 80 रुपए तक चंदा लेने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि टाटा स्टील की जमशेदपुर इकाई में अभी कर्मचारियों के वेतन से चंदा की राशि काटी जाती है। शुरुआती दौर में एक वक्त टाटा वर्कर्स यूनियन के लोग कारखाना के भीतर जाते थे। एक एक कर्मचारी को खोज खोज कर उसने चंदा की राशि लेते थे। अब चंदा कटौती में न कर्मचारी की किसी तरह की दिक्कत आती है न यूनियन को। चंदा की राशि से यूनियन का कामकाज सुचारू तरीके से चल रहा है। यूनियन जो भी खर्च करती है, उसे हरेक दो माह में कमेटी मीटिंग में पारित कराने की व्यवस्था है। ऐसा इसलिए है कि यूनियन के कोष का दुरुपयोग नहीं किया जा सके।


यूनियन को चलाने के लिए चंदा तो जरूर चाहिए मगर जमशेदपुर इकाई के बराबर नहीं

“किसी भी ट्रेड यूनियन को लंबे समय तक व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए चंदा ही एकमात्र उपाय है। कलिंगा नगर में अब कंपनी की क्षमता 8 मिलियन टन हो चुकी है। कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ी है। यूनियन का काम भी बढ़ रहा है। इसलिए चंदा कटौती की दिशा में कार्यवाही करनी ही होगी। हम लोग यह नहीं चाहते है कि जमशेदपुर इकाई के बराबर कलिंगा नगर में भी चंदा की राशि की कटौती की जाए। हां, वेज रिवीजन के समझौता में यूनियन जमशेदपुर के कर्मचारियों से अधिक या बराबर दिलाने का प्रयास जरूर कर रही है। फिलहाल हमें उतना ही चंदा चाहिए जिससे यूनियन का कामकाज सुचारू तरीके से चलना शुरू हो जाय।”

– रवींद्र जामुदा, अध्यक्ष, टाटा स्टील कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन

(🖊️ लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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