ओल्ड ग्रेड को फीसद में एमजीबी मिलेगा, एनएस को ओल्ड के समान ग्रेड के बराबर मिलेगी रकम
ओल्ड ग्रेड के कर्मचारियों के डीए के फ्रीज मुक्त के वायदे को पूरा कराना नहीं होगा आसान
रवि, पीएन और रघुनाथ की परंपरा को कायम रखने को एक या दो नए एलाउंस की कवायद
क्वार्टर का किराया बढ़ेगा, बिजली और पानी के मासिक शुल्क में भी वृद्धि के लिए रहिए तैयार
एलाउंस का एरियर दिलाने की वायदा बस कुर्सी पाने का तरीका, ऐसे वायदे याद भी नहीं रहते
एस वंदना
टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट में वेज रिवीजन का मसला टी ट्वेंटी मैच की तरह बेहद उतार चढ़ाव वाला हो चुका है। वेज रिवीजन को लंबित हुए 16 महीने गुजर चुके हैं। टाटा स्टील प्रबंधन चाहता है कि जल्दी वेज समझौता हो जाय। टाटा वर्कर्स यूनियन के शीर्ष नेतृत्व की भी चाहत है कि वेज समझौता पर जल्द बात बन जाय। 70 फीसद से ज्यादा बिंदुओं पर कंपनी और यूनियन के बीच सहमति भी बन चुकी है। कुछ संवेदनशील मसले ऐसे हैं जिन पर बात आगे नहीं बढ़ रही है। यूनियन नेतृत्व जानता है कि ओल्ड हो या न्यू, डीए से जुड़े उनके मसले का सम्मानजनक समाधान नहीं हुआ तो दिक्कत हो जाएगी। इसी कारण अंदेशा है कि वेज रिवीजन के समझौता पर दस्तखत होने में कुछ और महीने लग सकते हैं। शायद मौसम बदल जाय।
टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट की उत्पादन क्षमता साढ़े 10 मिलियन टन है। फिलहाल तकरीबन 10 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें 3 हजार कर्मचारी ओल्ड ग्रेड (स्टील ग्रेड) के हैं तो 7 हजार न्यू सीरीज (एनएस) के इम्प्लाइज है। वेज रिवीजन में 16 महीने का विलंब हो चुका हैं। इस देरी के कारण एनएस ग्रेड के कर्मचारी खदबदाये हुए हैं। जबरदस्त जिज्ञासा है तो खूब गुस्सा भी। नए वित्तीय वर्ष से भारत सरकार के नए श्रम कानून के प्रभावी होने के बाद टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट में वेज रिवीजन की वार्ता ने स्वरूप लेना शुरू कर दिया है। आर रवि प्रसाद के कार्यकाल में हुए पिछले वेज रिवीजन का वर्तमान यूनियन अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी उर्फ टुन्नू चौधरी ने जम कर विरोध किया था। अजय चौधरी और संजय सिंह के साथ मिल कर वे लगातार वेज रिवीजन के मसले पर आवाज बुलंद करते रहे थे। पी एन सिंह के कार्यकाल में बहुप्रचारित ग्रेड रिवीजन हुआ था तो डिप्टी प्रेसिडेंट के नाते वार्ताकारों में टुन्नू भी शामिल थे। यही कारण है कि आर रवि के वक्त हुए ग्रेड रिवीजन की टुन्नू चौधरी ने जो भी बुराई की, उसे टाटा स्टील के कर्मचारियों ने खूब तवज्जो दिया था। उन्होंने समझाया था कि वेज रिवीजन में देरी से एलाउंस के एरियर का नुकसान हुआ है। टुन्नू ने ओल्ड ग्रेड के कर्मचारियों के डीए (महंगाई भत्ता) को फ्रीज (हर ग्रेड के मुताबिक प्रतिशत में मिलने वाली डीए की राशि की अधिकतम सीमा का निर्धारण) करने का पुरजोर विरोध किया था। एनएस के कर्मचारियों के वेरिएबल डीए का प्रति प्वाइंट वैल्यू 3 रुपए से अधिक करने की वकालत की थी। रवि द्वारा किए गए ग्रेड समझौता में ओल्ड ग्रेड के लिए 13 फीसद से कम एमजीबी मिलने की भी टुन्नू एंड टीम ने आलोचना की थी। अब टुन्नू निर्विरोध अध्यक्ष हैं। उन्होंने उम्मीदें तो खूब जगाई हैं। अब उन्हें साकार करने का दबाव है। नए वेज समझौता के लिए कई बातों पर सहमति हो चुकी है। हरेक वेज के बाद क्वार्टर का किराया, बिजली और पानी शुल्क भी बढ़ाया जाता रहा है। स्वाभाविक है कि अगले वेज समझौता के बाद यह सब खर्च तनिक बढ़ जाय।
रवि के ग्रेड की तुलना में अधिक एमजीबी दिलाने की जद्दोजहद संजीव कुमार चौधरी
टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी की कोशिश पूर्व अध्यक्ष आर रवि प्रसाद से अधिक एमजीबी (मिनिमम गारंटेड बेनिफीट) दिलाने की है। रवि के नेतृत्व में हुए वेज समझौता में ओल्ड ग्रेड के कर्मचारियों को 12.75 प्रतिशत एमजीबी मिला था और उसी के मुताबिक समकक्ष एनएस कर्मचारियों को एमजीबी की राशि दी गई थी। टुन्नू को पता है कि रवि की तुलना में एमजीबी का प्रतिशत कम हुआ तो कर्मचारियों को समझाना मुश्किल हो जाएगा। संभव है कि वो 13 से 14 फीसद तक एमजीबी दिलाने में कामयाब हो जाय। याद हो कि पीएन सिंह के समय 18.25 प्रतिशत एमजीबी मिला था तो रवि के वक्त 12.75 फीसद। टुन्नू की कोशिश यह भी है कि आर रवि की तुलना में ग्रेड रिवीजन के समझौता में अपेक्षाकृत कम विलंब हो। यह भी संभव है कि वेतन बढ़ोत्तरी के लिए स्पेन की संख्या कुछ बढ़ जाय।
एनएस का वेरिएबल डीए का प्रति प्वाइंट वैल्यू 3 रुपए से बढ़ाना आसान नहीं, फिक्स डीए बढ़ेगा
टाटा स्टील के एनएस कर्मचारियों का सबसे बड़ा मुद्दा डीए ही रहा है। पीएन सिंह के कार्यकाल में वेज रिवीजन का समझौता हुआ था तो ओल्ड ग्रेड की तरह डीए की गणना प्रतिशत में नहीं किए जाने के विरोध में एनएस कर्मचारियों ने टाटा वर्कर्स यूनियन के कार्यालय का घेराव किया था। तब वेज की वार्ता करने वाले टॉप थ्री में टुन्नू चौधरी भी थे। उस वक्त एनएस कर्मचारियों ने यूनियन कार्यालय में शाहनवाज आलम और सतीश सिंह को घेर कर धूप में खड़ा रखा था। एनएस को भी प्रतिशत के आधार पर डीए मिलने की संभावना दूर दूर तक नहीं दिखती। टुन्नू की कोशिश यह जरूर है कि वेरिएबल डीए का प्रति प्वाइंट वैल्यू 3 रुपए से अधिक हो। अगर इस पर भी बात नहीं बनी तो फिक्स डीए की राशि तकरीबन दोगुनी हो सकती है।
कर्मचारियों की संख्या कम होगी, शिफ्ट ड्यूटी बढ़ेगी तो नाइट शिफ्ट भत्ता में भी बढ़ोत्तरी संभव
टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी उर्फ टुन्नू, महामंत्री सतीश सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश कुमार सिंह और टाटा स्टील में मानव प्रबंधन के इंडिया मैनुफेक्चरिंग चीफ (सीएचआरओ)
जुबिन पालिया और आईआर, लीगल एंड कॉन्ट्रैक्ट वर्क फोर्स मैनेजमेंट चीफ राहुल दुबे लगातार जनरल ऑफिस में वेज रिवीजन के वार्ता की मेज पर बैठ रहे हैं। भारत सरकार के नए कानून के तहत अब पुरुष के साथ महिला कर्मचारियों को भी तीनों शिफ्ट की ड्यूटी करनी है। कुछ शर्तों के साथ। इसे बढ़ावा देने के लिए नाइट शिफ्ट एलाउंस (रात्रि पाली भत्ता) में दमदार बढ़ोत्तरी हो सकती है। रोजाना का नाइट शिफ्ट एलाउंस 250 से 300 रुपए हो सकता है। रवि के कार्यकाल में नया डेटा एलाउंस शुरू हुआ है। उसमें मामूली वृद्धि संभव है। रवि ने सेफ्टी समेत अन्यान्य मसले पर टीम परफॉर्मेंस अवार्ड नामक तीन माह पर चार हजार रुपए तक मिलने वाला एलाउंस शुरू कराया था। इसमें भी हल्की बढ़ोत्तरी हो सकती है। एक्टिंग एलाउंस का भी भरपूर मजा मिलेगा, फिलहाल ऐसा नहीं लगता।
कर्मचारियों के बच्चों की पढ़ाई के लिए प्रति माह की फीस का एलाउंस 600 रुपए से बढ़ाया जाएगा
आर रवि प्रसाद की अगुवाई में वेज समझौता के पहले कर्मचारियों के बच्चों की पढ़ाई में कंपनी प्रबंधन द्वारा अनुदान दिया जाता था। कंपनी एडेड स्कूलों में पहली से दसवीं कक्षा तक पढ़ने वाले दो बच्चों के मासिक शिक्षण शुल्क में 300 रुपए की रियायत मिलती थी। आर रवि प्रसाद ने अपने वेज समझौता में नर्सरी से इंटर तक प्रति माह शिक्षण शुल्क में अनुदान की राशि 600 रुपए कराई। कंपनी एडेड स्कूल में पढ़ाई करने पर ही अनुदान की बाध्यता खत्म कराई गई। देश के किसी भी स्कूल में पढ़ने पर दो बच्चों के लिए 6/6 सौ रुपए एलाउंस देना तय हुआ। इस बार मासिक शिक्षण शुल्क का अलाउंस बढ़ा कर 900 से 1200 रुपए तक किया जा सकता है। कारण कि स्कूलों की फीस में बहुत वृद्धि हुई है।
अपने करीबी ऑफिस बेयरर्स के साथ लगातार परामर्श कर रहे टुन्नू चौधरी और सतीश सिंह
जनवरी 2027 में टाटा वर्कर्स यूनियन का चुनाव होना है। महज सात महीने बाद। चुनाव की दिशा तय करने में अगला वेज समझौता बेहद अहम होगा। यूनियन अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी और महामंत्री सतीश सिंह के बीच एक दूसरे को पटखनी देने की सियासत गरम है। शैलेश कुमार सिंह, संजय सिंह, अजय चौधरी और राजीव चौधरी फिलहाल टुन्नू चौधरी के करीबी ऑफिस बेयरर्स है। महामंत्री सतीश सिंह की शाहनवाज आलम, अमोद दुबे, नितेश राज और संजीव तिवारी के साथ सतत परामर्श चल रहा है। नितेश राज अवश्य तीसरा खेमा बनाने की बात कहते रहते हैं।
