कलिंगा नगर प्लांट के कर्मचारियों को अपने विभाग से कमेटी मेंबर चुनने का मिलेगा मौका
यूनियन पदाधिकारियों के चुनाव की प्रक्रिया का नए सिरे से नियम बनाए जाएंगे ताकि लोकतंत्र रहे
नए लेबर कोड के तहत यूनियन की कार्यकारिणी समिति का कार्यकाल करने का भी प्रावधान होगा
यूनियन पदाधिकारियों की संख्या बढ़ाने पर भी चिंतन मंथन, ऑफिस बेयरर्स के अधिकार भी निर्धारित होंगे

अश्विनी रघुवंशी
टाटा स्टील की कलिंगा नगर इकाई में मान्यता प्राप्त टाटा स्टील कलिंगा नगर यूनियन के संविधान में निकट भविष्य में बड़ा बदलाव किया जाएगा। ट्रेड यूनियन एक्ट के नियम और प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए यूनियन के संविधान में संशोधन की कार्यवाही को पूरा किया जाएगा। अभी यूनियन के सिर्फ ऑफिस बेयरर्स (पदाधिकारी) हैं। भविष्य में यूनियन में कमेटी मेंबर भी होंगे जो विभागों में सीधे कर्मचारियों द्वारा चुने जाएंगे। यूनियन संविधान में दर्ज किया जाएगा कि कितने कमेटी मेंबर होंगे और कितने ऑफिस बेयरर्स। संविधान में यूनियन के सभी पदों पर चुनाव की प्रक्रिया को भी दर्ज किया जाएगा। और भी बहुत ऐसे बदलाव दर्ज किए जाएंगे जिससे भविष्य में यूनियन के संचालन में किसी भी तरह का संशय नहीं रहे।
टाटा स्टील प्रबंधन की कोशिश है कि सभी इकाइयों की यूनियन में लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावी की जाय ताकि कर्मचारियों की पर्याप्त भागीदारी रहे। यही वजह है कि टाटा स्टील कलिंगा नगर सर्कस यूनियन के संविधान में भी संशोधन के लिए चिंतन मंथन शुरू हो चुका है। कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन ने टाटा स्टील की जमशेदपुर इकाई की मान्यता प्राप्त टाटा वर्कर्स यूनियन के संविधान का अध्ययन शुरू कर दिया है। टाटा वर्कर्स यूनियन बहुत पुरानी है। उसकी ख्याति राष्ट्रीय स्तर पर है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस, वी जी गोपाल जैसे कई स्वनामधन्य लोग इसका नेतृत्व कर चुके हैं। यहां ऐसी व्यवस्था बनाई जा चुकी है कि यूनियन में कर्मचारियों की भागीदारी हो। यहां विभाग स्तर पर कर्मचारी मतदान के जरिए कमेटी मेंबरों का चुनाव करते हैं। कमेटी मेंबर मिल कर ऑफिस बेयरर्स को चुनते हैं। कमेटी मेंबरों को ही जेडीसी में शामिल किया जाता है जो विभागीय स्तर पर कंपनी अधिकारियों के साथ मिल कर कंपनी के संचालन में सामूहिक भागीदारी निभाते हैं। कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन के संविधान में भी टाटा वर्कर्स यूनियन की कुछ न कुछ झलक दिख सकती है। संभावना है कि वेज रिवीजन का समझौता होने के पहले अथवा उसके बाद में संविधान संशोधन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाय। यह भी संभव है कि संविधान संशोधन के बाद ही उसी अनुरूप टाटा स्टील कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन का नए सिरे से चुनाव कराया जाय।
::: यूनियन संविधान में यह सब बदलाव भी संभव :::
- भारत सरकार ने नए लेबर कोड बनाए हैं। इसमें ट्रेड यूनियन के कार्यकाल को नए सिरे से तय करने की व्यवस्था भी हो सकती है। कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन का कार्यकाल भी नए लेबर कोड के मुताबिक करने का प्रावधान किया जा सकता है।
- कमेटी मेंबर की संख्या के निर्धारण के लिए कोई फार्मूला बनाया जा सकता है। यह भी संभव है कि कमेटी मेंबरों की न्यूनतम संख्या निर्धारित की जाए।
- यूनियन के आय व्यय को पारदर्शी बनाए रखने का प्रावधान भी यूनियन के संविधान में किया जा सकता है। चूंकि, यूनियन कर्मचारियों के चंदा से चलाई जाती है। इसलिए उस राशि के अंकेक्षण की व्यवस्था को संविधान में दर्ज करना अनिवार्य है।
कलिंगा नगर में मजदूर राजनीति करनी है तो वर्कर्स यूनियन का सदस्य होना अनिवार्य होगा
टाटा स्टील की कलिंगा नगर इकाई में किसी को भी मजदूर राजनीति करनी है तो उसे टाटा स्टील कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन का सदस्य बनना अनिवार्य होगा। कर्मचारी चाहे तो दूसरी ट्रेड यूनियन से जुड़े रह सकते है, लेकिन टाटा स्टील प्रबंधन हर स्तर पर कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन के चुने हुए प्रतिनिधियों की सुनेगा।उन्हीं के साथ मजदूरों के किसी भी मसले पर समझौता किया जाएगा। यूनियन सदस्य ही कमेटी मेंबर और ऑफिस बेयरर्स का चुनाव लड़ने की पात्रता रखेंगे। जो यूनियन सदस्य नहीं होंगे, वे किसी भी चुनाव में उमीदवार या मतदाता होने के पात्र नहीं हो पाएंगे।
कर्मचारियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए यूनियन के संविधान में सुधार जरूरी

“टाटा स्टील कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन में कर्मचारियों की भागीदारी बढ़ाई जानी है। कंपनी का मत है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए ट्रेड यूनियन में कर्मचारियों की सहभागिता और अधिक होनी चाहिए। इसी कारण यूनियन के संविधान में बदलाव करना होगा। कानूनी प्रक्रिया के तहत यह सब किया जाएगा।”
— रवींद्र जामुदा, अध्यक्ष, टाटा स्टील कलिंगा नगर वर्कर्स यूनियन
(🖊️ लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं )
